आकर्षण के सिद्धांत को समझने के लिए अपने विचार को समझें | How To Understand The Secret

नमस्कार दोस्तों इस Article में आज मैं बताऊँगा , आकर्षण का सिद्धांत के लिए अपने विचारों की Frequency कैसे बदल कर कोई भी चीज आकर्षित करने के लिए तैयार कर सकते है । How To Understand The Secret.

अब इतना तो हम सब जानने लगे हैं कि हमारा वर्तमान जीवन हमारे पुराने विचारों का प्रतिबिंब है ।  इसमें जो भी अच्छी हैं और उतनी अच्छी भी नहीं है ।

अगर हम लोग अपने दिमाग में अटूट विश्वास के साथ यह सोच ले कि हम क्या चाहते हैं , और उसे अपना प्रबल विचार बना ले तो वह चीजें हमारे जीवन में अवश्य प्रकट हो जाएगी ।यह आकर्षण का सिद्धांत 5 सरल शब्दों में बताया गया है। “विचार, वस्तु , बन, जाते, हैं”

विचार वस्तु बन जाते हैं इस सबसे शक्तिशाली नियम से हमारे विचार हमारे जीवन की वस्तुओं के रूप में प्रकट हो जाती हैं। विचार वस्तु बन जाते हैं यह सूत्र अपने जीवन में बार-बार दोहराए …
कहीं घूम रहे हैं तो… सफर में है तो …घर पर हैं तो…
आप किसी भी जगह हो सकते हैं, इसे बार-बार दोहराते रहें और उसे अपनी चेतना तथा अपनी जागरूकता में उतर जाने दे !
और होगा यह… वह अपके जीवन में दिखने लगेगी और आपके विचार वस्तु बन जाएंगे।

कोई भी चीज आकर्षित कैसे होता हैं?

हममें से ज्यादातर लोग यह नहीं जानते हैं कि हमारे अंदर चल रहे विचार की एक फ्रीक्वेंसी होती है। और हम उस विचार कि फ्रीक्वेन्सी को माप सकते हैं।

यही विचार फ्रीक्वेंसी चबंकीय के होते हैं हम लोग जो भी सोचते हैं वह फ्रीक्वेंसी तत्काल पूरे ब्रह्मांड में चले जाते हैं ।और चुबंक की तरह उस जैसी चीजें को विचार को हमारी तरफ आकर्षित करता है।

किसी भी स्रोत से भेजी गई चीजें उस स्रोत तक वापस लौटती है,, और हम यहां लगातार बातें विचार की कर रहे हैं, जो आपके विचार स्रोत की हैं।  और वह स्रोत आप हैं !….

प्रबल विचार या मानसिक दृष्टिकोण जो अपने अंदर लगातार कल्पना करते हैं वह चुबंक है।

 नियम यह है कि समान चीजें समान चीजों को आकर्षित करती है, परिणाम स्वरूप मानसिक दृष्टिकोण हमेशा अपनी प्राकृतिक के अनुरूप स्थितियों को आप की ओर आकर्षित करेगा।

हम अपने विचार को और आसानी से समझने के लिए इस तरह सोचे !

अपने विचार को और आसानी से समझने के लिए इस तरह से सोचे
मान लीजिए किसी टेलीविजन स्टेशन का एक टावर होता है जिसे ट्रांसमिशन टावर कहते है। और वह टावर खास तरह के फ्रीक्वेंसी पर प्रसारण करता है और वह फ्रीक्वेंसी चारों तरफ फैल जाती हैं।
जो हमारे टेलीविजन में तस्वीर में बदल जाती हैं और वह अलग अलग चैनल की अलग अलग फ्रीक्वेंसी छोड़ती रहती है।
सच तो यह है कि हम में से ज्यादातर यह नहीं जानते हैं कि यह कैसे होता हैं। लेकिन हम इतना तो जरूर जानते हैं कि हर चैनल की एक फ्रीक्वेंसी होती है। और जब हम उस फ्रीक्वेंसी पर चैनल सेट करते हैं तो हमें अपने टेलीविजन पर तस्वीरें दिखने लगती है।
तो हम चैनल सुनकर फ्रीक्वेंसी चुनते हैं फिर इसके बाद हमें उस चैनल पर प्रसारित होने वाली तस्वीरें मिलती हैं।

अगर हम लोगों को अपने टेलीविजन पर अलग तस्वीरें देखना होता है तो हम चैनल बदल देते हैं और उसे दुसरे फ्रीक्वेंसी पर सेट कर देते हैं हम उसे देखने लग जाते हैं

इसी तरह आप मानवीय ट्रांसमिशन टावर हैं और इस धरती पर बने किसी भी टेलीविजन टावर से ज्यादा शक्तिशाली हैं।आप ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली ट्रांसमिशन टावर हैं आपका ट्रांसमिशन आपके जीवन और संसार की रचना करता है। हमारे द्वारा प्रसारित फ्रीक्वेंसी हमारे शहरों , देशों , संसार के पार पहुंच जाती हैं। वह पूरे ब्रह्मांड में गूंजने लगती हैं और उस फ्रीक्वेंसी को हम सब अपने ही विचार से प्रसारित कर रहे हैं ।

हमारे विचारों के प्रसारण से हमें जो तस्वीरें मिलती हैं वह हमारे घर के टेलीविजन स्क्रीन पर तो नहीं दिखाई देती हैं ।वह सारी तस्वीरें तो हमारे जीवन में दिखाई देती हैं। हमारा विचार ही फ्रीक्वेंसी सेट करते हैं।

उस फ्रीक्वेंसी पर मौजूद समान चीजें को आकर्षित करते हैं , और फिर हमारे विचारों को जीवन के तस्वीर के रूप में हमारी ओर प्रसारित कर देते हैं ।

अगर हम अपने जीवन के किसी रूप को बदलना चाहते हैं तो अपने विचार बदलकर चैनल और फ्रीक्वेंसी बदल सकते हैं और अपने जीवन में जो देखना चाहते हैं उसे उस पर सेट कर सकते हैं ।

 

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