आकर्षण का नियम कैसे काम करता है ?Akarshan ka niyam kya hai

Akarshan ka niyam kya hai ?

हम सबको मालूम है कि हम इस पृथ्वी पर हैं।  अगर हम कोई भी वस्तु ऊपर उछलते हैं या ऊपर फेंकते हैंं  तो वह वस्तु ऊपर से गिरने पर सीधी पृथ्वी की ओर आती है ।

ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई अलक्ष्य और अज्ञात शक्ति से पृथ्वी की ओर खींच रही है। कोई भी पिंड जब ऊपर से गिरता है तब वह एक नियत त्वरण से पृथ्वी की ओर आता है। त्वरण का यह मान सभी वस्तुओं के लिए एक समान रहता है।

शायद आपको मालूम होगा कि सर आइज़क न्यूटन ने अपनी मौलिक खोज के आधार पर बताया कि केवल पृथ्वी ही नहीं अपितु विश्व का प्रत्येक कण अन्य दूसरे कण को अपनी और आकर्षित करता रहता है इसी तरह आकर्षण का सिद्धांत भी हमारे विचार प्रतिक्रिया द्वारा काम करता है, और करता रहता है।

हमारे जीवन पर आकर्षण कैसे काम करता है ?

आकर्षण के नियम को अपने जीवन पर लागू करने का सबसे आसान तरीका यह है कि हम सभी को अपने आप में एक चुंबक मान लेना है और हम सभी जानते हैं कि एक चुंबक दूसरे चुंबक को अपनी और आकर्षित करता हैं ।

इसी तरह हम जो भी चीज चाहेंगे उसे दूसरा  चुंबक मान लेंगे , और वह हमारी तरफ आकर्षित होगा।

आप ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली चुंबक हैं आप में ब्रह्मांड के ऐसी चुंबकिय शक्ति हैं जो दुनिया के किसी भी चीज से ज्यादा शक्तिशाली हैं और यह अनजान चुंबकिय शक्ति हम सब के अंदर चल रहे हमारे विचार से जागृत होती हैं ।

अपने जीवन पर किसी भी चीज को आकर्षित करने के लिए मूलभूत रूप से आकर्षण का नियम कहता है कि समान चीजें समान चीज को आकर्षित करती  हैं यानी हम दरअसल बात विचार के कर रहे हैंं।

यानी आकर्षण का नियम कहता है कि समान चीजें समान चीजों को आकर्षित करती हैं तो आपने अपने जीवन में आकर्षण के नियम के संदर्भ में हम सब ने यह अनुभव किया होगा कि आप कभी किसी ऐसी घटना के बारे में सोचने लगे होंगे जो आपके लिए वह अच्छा नहीं था ।

आपने उस चीज के बारे में जितना ज्यादा सोचा होगा वह उतनी ही ज्यादा बुरी लगने लगी होगी।थोड़ी देर सोची ऐसा क्यों हुआ होगा  …

ऐसा इसलिए हुआ होगा क्योंकि जब आप लगातार एक ही विचार सोचते हैं तो आकर्षण का नियम तत्काल उसी जैसे दूसरे अन्य  विचारों को आपके ओर लाने लगता है, चंद मिनटों में ही आपके दिमाग में इतने सारे दुखद विचार आने लगता है कि स्थिति पहले से ज्यादा बुरी दिखने लग जाएगी ।

आप इस तरह के विचार के बारे में जितना ज्यादा सोचते हैं और सोचेंगे उतना ही ज्यादा परेशान होंगे, होने लगेंगे।

हो सकता है आपने इसके बजाय यह भी अनुभव किया होगा किसी ऐसी चीज के बारे में जिससे आपको मजा आया होगा और आपने उसके बारे में सोच कर बहुत ही ज्यादा खुशी अनुभव किया होगा और आप मुस्कुरा दिए होंगे।

            ऐसा क्यों हुआ Akarshan ka niyam kya hai?

मान लीजिए कभी उल्लास के समय कोई गाना, घटना या वह पल देखने सुनने के बाद आप उसे अपने दिमाग से नहीं निकाल पाए हो ।

वह गाना, घटना या पल आपके दिमाग में बार-बार चल रहा होगा, हो सकता है, आपको मालूम भी ना हो… लेकिन आपने उस पल को अपने दिमाग में उस समय अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर लिया था।

ऐसा करके आप उस समय के उल्लास के विचार जैसे अन्य विचार को सशक्त रूप से आकर्षित कर रहे थे।

इसलिए आकर्षण का नियम सक्रिय हो गया । और उसने उस पल के विचार से मिलते जुलते विचारों को आकर्षित कर दिया होगा । और आपको बहुत आनंदित और खुशी महसूस हो रहा होगा ।

इसी तरह से आकर्षण का नियम हमारे जीवन पर कार्य करता है।

हम अपने बारे में कैसे विचार रखें ?

इंसान होने के रूप में हमारा काम है हमें अपने दिमाग में ऐसे विचार रखना है जिन्हें हम चाहते हैं।

हमें इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए कि हमें यह क्यों और किस लिए चाहिए । कि हम क्या चाहते हैं ? ऐसा करके हम ब्रह्मांड के महानतम नियमों में से एक को सक्रिय कर देते हैं।

  जो आकर्षण का नियम है।  हम जिस बारे में सबसे ज्यादा सोचते हैं वही बन जाते हैं, हम जिस वस्तु या व्यक्ति के बारे में सबसे ज्यादा सोचते हैं उसे अपनी ओर आकर्षित भी करते हैं।

आकर्षण के सिद्धांत के तौर पर हम सब को अपने आप में इतना तो मानना पड़ेगा कि हमारा वर्तमान जीवन हमारे पुराने विचारों का ही प्रतिबिंब है।  इसमें हमारे आसपास मौजूद वे सारी अच्छी बुरी चीजें शामिल है।  जो बहुत अच्छा है या बहुत बुरी चीजें हैं। और जो भी होगी उसे अपनी और आकर्षित करेंगे।

जिसके बारे में आप सबसे ज्यादा सोचते विचारते हैं।  इसलिए यह आसानी से पता चल सकता है कि जीवन के हर क्षेत्र के बारे में कि हमारी प्रबल विचार क्या है।  क्योंकि यह सारी चीजें हकीकत में बदल चुके हैं ।

अब तक! और हम आशा करते हैं कि …अब आप रहस्य  सीख रहे हैं और इस पर अमल करके हर चीज बदल सकते हैं।  धन्यवाद

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