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आखिर 15 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है स्वतंत्रा दिवस

15 अगस्त 1947 ईस्वी को हमारा देश आजाद हुआ था । हमारा देश लगभग 200 वर्ष बिक्री सरकार द्वारा गुलामी की जंजीरों में जकड़ी हुई थी । 15 अगस्त के दिन एक नए भारत का जन्म हुआ, इस दिन को पाने के लिए ना जाने कितनी वीरों की प्राण की आहुति देनी पड़ी कितने महिला बच्चों बुजुर्गों की जान की बाजी लगाने पर क्या-क्या तकलीफे उठाकर, जिसका विवरण जितना करो उतना ही कम है।  जैसे हमारे वीर पुरुष भगत सिंह को कम ही उम्र में फांसी दे दी।  इससे हमारे देश के लोगों को आज इतिहास के पन्ने में उनका नाम याद किया जाता है।  हमारे भारतीय को नमक बंद कर दिए लेकिन धन्य हो हमारे गांधी जी को जिन्होंने हमें नमक बना कर दिए । आज भी हम लोग उन्हीं के दिन के वजह से नमक खाते हैं ऐसा ऐसा बहुत से कारनामे किए । 

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15 अगस्त क्यों मनाई जाती है ?

एक रोचक की कहानी है जिसे सुनने के बाद आपकी रूह कांप उठेगी जलियांवाला बाग हत्याकांड के बारे में आप शायद जानते होंगे । उसमें हमारे भारतीय जनता इकट्ठा होकर कुछ बातें कर रही थी ।  तभी वहां जनरल डायर को मालूम चला कि हमारे खिलाफ जलियांवाला बाग में साजिद चल रहा है।  लेकिन डर के खिलाफ कोई साजिश वाली बातें नहीं थी । वहां मेला की लगा हुआ था और दूसरे आदमी घूमते घूमते वहां आ गए थे।  लेकिन बहुत पक्का होने की वाली बात यह भी है कि उस भाग में सिर्फ एक ही द्वार था वही जनरल डायर ने फायरिंग का आदेश दे दिया बिना समझे हुए जिससे ना जाने कितने दिवस मासूम की जाने चली गई जिसमें गोली रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था जिसमें लोग अपनी जान बचाने के लिए बहुत लोग हुए में कूद गए और कुछ समय में जमीन का रंग लाल हो गया 370 की मौत हुई 1000 लोगों की हत्या हुई सभी बातों को याद करते हमारे आत्मा अभी भी क्लब जाते हैं इन सभी हीरो के आत्म लिदान को याद करते हुए हम 15 अगस्त मनाते हैं और इसका भी कारण है कि फिर कोई लुटेरे आगे हमारे देश पर कब्जा करके हमें गुलाम ना बनाएं । 

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15 अगस्त का इतिहास?

यह एक रोचक भरी इतिहास है, इससे जाना हर भारतीय इच्छुक रहेंगे । दिल्ली में 14 अगस्त को शाम से ही जोरदार बारिश हो रही थी।  रात 9:00 बजे से बस से रायसीना हिल्स पर करीब 500000 लोग इकट्ठा हुए तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू राजेंद्र प्रसाद सरदार वल्लभभाई पटेल और माउंटबेटन भी करीब 10:00 बजे हुआ है । जरा में इकट्ठा हुए बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था ।  14 अगस्त 1947 ईस्वी के रात 12:00 बजने में कुछ ही देर बाद के थे । तब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दो लाइन कह कर अपना प्रवचन शुरू कर दिया । 

चंद ही मिनट में 12:00 बजे और 15 अगस्त का यह दिन खुशियां लेकर आया ।  190 सालों बाद बैटरी सुकोमल से देश स्वतंत्र हुआ।  लेकिन खुशियों के साथ उतना ही गम था, क्योंकि भारत ने अपना 346737 स्क्वायर पूरा विस्तार करीब 800000 लोगों को एक ही रात में गवा दिए।  देश दो टुकड़ों में विभाजित हुआ था । हिंदुस्तान और पाकिस्तान हिंदुस्तान यूं ही आजाद नहीं हुआ 15 अगस्त से बहुत पहले ब्रिटिश हुकूमत का अंत होना शुरु हो गया था। 

महात्मा गांधी के जन आंदोलन से देश में नई क्रांति की शुरुआत हुई थी तो एक और सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद के फौज ने अंग्रेजों का जीना दुश्वार कर रखा था । ऊपर से दूसरे विश्वयुद्ध से ब्रिटिश सरकार के पास इतना दम नहीं था कि वह हिंदुस्तान पर ज्यादा दिन तक हुकूमत करें इसलिए माउंटबेटन को भारत आखिरी वायसराय बनाया ताकि देश के अधिकारिक तरीके से स्वतंत्र देश को अंग्रेजों ने शुरुआत में 3 जून 1848 इसवी और देश आजाद करने की घोषणा की थी । लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान नामक अलग मूर्ख बनाने की ठान ली थी।  जिसके चलते देश में कई जगह संप्रदायिक ऐसा चलने लगा विकट परिस्थितियों को देखकर अंग्रेजों ने भारत को हो सके जितना जल्दी स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर देना चाहते थे, क्योंकि अंग्रेजों को भी भारत को एक टुकड़े नहीं दो टुकड़े में विभाजित करना था ।

स्वतंत्रता के लिए दिन 15 अगस्त ही क्यों चुना गया था।  इसके लिए हम भारतीय ही नहीं शुभ अशुभ मानते हैं, बल्कि अंग्रेज भी उतना ही मानते थे।  माउंटबेटन मानना था 15 अगस्त का दिन शुभ है, क्योंकि 15 अगस्त दिन ही जापान ने सरणागति स्वीकारी थी । और इसके ऑफिशियल सन 2 सितंबर को हुए थे।  इसलिए बेनटेन के अनुसार राष्ट्र मित्र के लिए शुभ था तो रात 12:00 बजे के वक्त ही क्यों लिया । क्योंकि भारत के ज्योतिषियों का मानना था कि वह वक्त देश के स्वतंत्रता के लिए शुभ है तय किया गया था । पंडित नेहरू को रात 12:00 बजे पहले अपना स्पीच 12:00 बजे से पहले ही समाप्त कर देनी है।  फिर चकना के साथ भारतीय लोकतंत्र की शुरुआत होगी ठीक इसी प्रकार हुआ 15 अगस्त सुबह 8:30 में पंडित नेहरू और कैबिनेट ने पद और गोपनीयता की शपथ ली रात के लगातार बारिश के वजह से सुबह आसमान बिल्कुल साफ था।  

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आजादभारत तिरंगे को लहराते हुए अपने आंखों से देखने का देश के तिरंगे को पहले जवाहरलाल नेहरू ने रात को 12:00 बजे पार्लियामेंट सेंट्रल हॉल में लहराया था । और दूसरी बार सुबह 8:30 में लाया जनता के सामने बैटरी राष्ट्रध्वज को उतारकर राष्ट्रीय ध्वज को पढ़ाया गया।  आजादी के बाद दोस्त अंग्रेजों ने एक साथ भारत को नहीं छोड़ा था।  आजाद भारत के कुछ आला अफसर कुछ समय तक अंग्रेजी रहे 1520 सहने की पहली टीम 17 अगस्त 1947 ईस्वी के दिन अपने देश रवाना हुई ,तो आखिरी टीम 27 अगस्त 1948 ईस्वी को निकले ताज्जुब की बात तो यह है कि लुटेरे अंग्रेज हमारे देश अतिथि बनकर आए हो उस तरह से उन्हें विदा किया गया की आखिरी फौज ने जब मुंबई के बंदरगाह से विदाई ली ।

तब जॉर्ज पंचम को विदाई देने वाला गीत बैंड बाजे के साथ दिया गया आजादी से 190 वर्ष पहले भीअमीर चंद मीर जाफ़र रोबर्ट गलाइन को ऐसे ही सम्मान के साथ स्वागत किया गया था । फिर भी हम भारतीय अतिथि देवो भावा को अपना तेरे फिर वह अतिथि थी हो या लुटेरे । 

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