ग्रामीण जीवन-यापन के स्वरूप

समाज में मौजूद अनेक तरह की परेशानी को जानिए।

भारत गांवों का देश है। यहां लगभग 6 लाख से अधिक गांव है। यदि आप अपने आस-पड़ोस में देखेंगे कि लोगों की जीवन-यापन संबंधित कार्यों में भिन्नता पाई जाती है।

बिहार में लोग अपना तरह-तरह के छोटी बड़ी दुकान, जैसे-चाय,नाश्ता,साइकिल मरम्मत की दुकान है।   गांव में कुछ परिवार कपड़े धो कर अपनी जीविका चलाते हैं।

ज्यादातर परिवार खेती से अपनी आजीविका चलाते हैं, या मुख्य रूप से गेहूं,चना, धान, मक्का, मशहूर,इत्यादि की खेती होती है ।  इसके अतिरिक्त यहां पर आम और अन्य फल के बगीचे भी लगाए जाते हैं। जीवन यापन के लिए लोग बागवान भी करते हैं । 

फलों को बाजार में बेचकर कुछ आय प्राप्त करते हैं।आजीविका के लिए यहां के लोग मछली पालन मुर्गी,बकरी इत्यादि बहुत कुछ पालते हैं।

 

एक माध्यम किसान की कहानी

मध्यम किसान की मजदूरी की कमी के कारण,बैंक का कर्ज चुकाने के लिए फसल जल्दी बेचनी पड़ती है।

क्योंकि कर्ज नहीं लौटाने पर पुनः कर्ज मिलने में परेशानी पड़ती है।मध्यम किसान जैसे लोगों को थोड़ी सी जमीन होती है, उसमें उनके परिवार का गुजारा हो जाता है।उन्हें किसी के यहां मजदूरी नहीं करनी पड़ती । 

परंतु उनके पास इतने पैसे भी नहीं होती कि खाद- बीज-कीटनाशक आदि समय पर खरीद सके।

 

एक सीमान्त किसान की कहानी

सीमांत किसान को आसानी से कर्ज नहीं मिल पाता है।उन्हें कई बार महाजन या साहूकार से ऊंची ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है। इस कारण फसल कटते ही, उसे बेचकर ब्याज समेत दिए गए कर्ज की रकम को लौटाने की जल्दी होती है।

अगर समय पर कर्ज की रकम वापस न कि गई। तो अत्यधिक ब्याज के कारण कर्ज की रकम वापस करना कर पाना संभव नहीं होता। उनके पास जमीन कम होती है,इसलिए आमदनी वैसे ही कम रहती है । 

ऐसी स्थिति के कारण सीमांत किसान खेती के नए-नए तरीकों का उपयोग नहीं कर पाते हैं। उन्हें अपनी जमीन से साल भर खाने के लिए अनाज नहीं हो पाता। उन्हें दूसरे के खेतों में भी खेती करना पड़ता है।

खेती और घर के खर्च के लिए उन्हें समय-समय पर कर्ज भी लेना पड़ता है।

 

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